Monday, February 9, 2026
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बटुक भैरव नाथ जी की दिव्य लीला

काशी सदैव से ही शिव की प्रिय नगरी रही है। काशी के कण-कण में महादेव स्वयं बसते हैं। एक समय की बात है काशी नगरी में ऐसी लीला प्रकट हुई जिसने यह सिखाया कि ईश्वर रूप, उम्र या वेश से नहीं बल्कि चेतना से पहचाने जाते हैं।

एक समय की बात है। काशी में अनेक विद्वान ब्राह्मण रहते थे। वे वेदों के ज्ञाता थे, यज्ञ और पूजा में निपुण थे, परंतु उनके मन में  इसी ज्ञान का अहंकार धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। ब्राह्मण अपने ज्ञान पर गर्व करने लगे और साधारण दिखने वाले लोगों को तुच्छ समझने लगे।

भोलेनाथ यह सब देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि अब समय आ गया है इन ब्राह्मणों को सच्चे ज्ञान का बोध कराने का। तब भगवान शिव  ने बटुक भैरव के रूप में धरती पर अवतार लिया।

एक दिन एक छोटा सा बालक, लगभग पाँच वर्ष का, नग्न पाँव, हाथ में खप्पर, आँखों में चमक और चेहरे पर अलौकिक तेज लिए काशी की गलियों में घूमने लगा। वह बालक था बटुक भैरव नाथ।

वह बालक उन ब्राह्मणों की सभा में पहुँचा और बहुत ही सरल स्वर में बोला “यदि आप इतने बड़े ज्ञानी हैं तो बताइए, शिव कौन हैं?”

ब्राह्मणों ने उस बालक की ओर देखा और हंसने लगे। उन्होंने सोचा यह तो एक साधारण बच्चा है। तभी उनमें से एक  ने उत्तर दिया “शिव निराकार हैं, वे हर जगह हैं।”

बटुक भैरव मुस्कुराए और बोले “यदि वे हर जगह हैं तो क्या आप उन्हें अपने भीतर देख पाए हैं?”

यह प्रश्न सुनकर सभा में सन्नाटा छा गया। किसी के पास बालक के प्रश्न का उत्तर नहीं था। क्रोधित होकर ब्राह्मणों ने उस बालक को अपमानित किया और सभा से निकाल दिया।

बटुक भैरव नाथ चुपचाप बाहर आ गए। उसी क्षण आकाश क्रोधित होकर गड़गड़ाया। धरती काँप उठी। वही बालक एक अत्यंत भयंकर और तेजस्वी रूप में प्रकट हुए। आँखों से अग्नि निकल रही थी, हाथों में त्रिशूल और डमरू था। पूरा काशी भय और भक्ति से भर गया।

ब्राह्मण समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं बल्कि स्वयं शिव के अवतार बटुक भैरव नाथ हैं। वे सभी उनके चरणों में गिर पड़े और क्षमा माँगने लगे। तब प्रभु बटुक भैरव नाथ ने कहा “ज्ञान वही है जिसमें अन्य के प्रति विनम्रता हो। भक्ति वही है जिसमें अहंकार न हो। जो अपने को दूसरों से बड़ा समझता है, वह सत्य से दूर हो जाता है।”

इतना कहकर उन्होंने पुनः बालक का रूप धारण कर लिया और अंतर्ध्यान हो गए। उस दिन के बाद काशी में महादेव के अवतार बटुक भैरवनाथ जी को श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। वे सदा ही अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, अहंकार का नाश करते हैं और सच्चे साधकों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

आज भी माना जाता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा से बटुक भैरव नाथ का स्मरण करता है, उसके जीवन से भय, नकारात्मकता और सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।

बोलो बटुक भैरव नाथ की जय

जय काल भैरव 🕉️✨

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