भगवान हनुमान जी का नाम मन में आते ही एक ऐसी शक्ति का अनुभव होता है जो डर को नष्ट कर देती है और विश्वास को जन्म देती है। प्रभु हनुमान केवल वानर रूप में पूजे जाने वाले देव नहीं हैं बल्कि वे वह चेतना हैं वह ऊर्जा हैं जो मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती है। हनुमान जी की कथा हमें यह सिखाती है कि सच्ची शक्ति केवल बाहुबल में नहीं बल्कि विनम्रता, अटूट भक्ति और कर्तव्यनिष्ठा में होती है।
हनुमान जी का जन्म माता अंजनाऔर महाराज केसरी के घर हुआ। वे पवन देव के आशीर्वाद से उत्पन्न हुए इसलिए उन्हें पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि जब माता अंजना ने कठोर तपस्या की तब भगवान शिव का अंश पवन देव के माध्यम से धरती पर अवतरित हुआ और वही हनुमान जी के नाम से जाने गए। इसीलिए उनमें भगवान शिव का तेज और पवन देव की गति दोनों समाहित हैं।
बचपन से ही हनुमान जी अत्यंत चंचल और तेजस्वी थे। एक दिन उन्होंने उगते हुए सूरज को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। यह घटना केवल उनके बाहुबल का प्रतीक नहीं थी बल्कि उनके निडर और निश्छल स्वभाव को दर्शाती थी। देवताओं ने जब यह दृश्य देखा तो उन्हें वरदान दिया कि वे अपार बल बुद्धि और विवेक से युक्त होंगे परंतु उसके साथ यह भी निश्चित हुआ कि वे अपनी शक्ति को तभी पहचानेंगे जब कोई उन्हें उसका स्मरण कराएगा।
हनुमान जी का जीवन तब पूर्णता को प्राप्त करता है जब उनका मिलन भगवान राम से होता है। सुग्रीव और श्री राम की मित्रता के समय हनुमान जी पहली बार भगवान राम के दर्शन पाते हैं। उसी क्षण वे पहचान जाते हैं कि भगवान राम ही उनके आराध्य हैं। उस एक दृष्टि में ही उन्होंने स्वयं को पूरी तरह श्री राम की भक्ति में समर्पित कर दिया। वे केवल श्री राम के परम भक्त नहीं बने बल्कि उनकी छाया बन गए।
भगवान राम के प्रति हनुमान जी की भक्ति निस्वार्थ थी। वे न पद चाहते थे न सम्मान। उनके लिए जीवन का एकमात्र उद्देश्य केवल श्री राम की सेवा करना था। चाहे वह सीता माता की खोज हो या लंका में प्रवेश करना हो हर कार्य में उनका केवल एक ही उद्देश्य था प्रभु का आदेश।
लंका यात्रा भगवान हनुमान जी की भक्ति लीला की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक है। समुद्र पार करना केवल उनके बाहुबल और शक्ति का प्रदर्शन नहीं था बल्कि उनके अटूट विश्वास का प्रतीक था। जब जामवंत जी ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया तब हनुमान जी ने समुद्र में छलांग लगाई और असंभव को संभव कर दिखाया। समुद्र यात्रा में आई हर बाधा हर परीक्षा को उन्होंने धैर्य और विवेक से पार किया।
लंका पहुँचकर माता सीता को ढूंढना और उन्हें भगवान भगवान राम का संदेश देना अत्यंत साहस का कार्य था। रावण की लंका में अकेले जाना और वहां अपनी पहचान को छिपाकर रखना यह दर्शाता है कि हनुमान जी केवल बलवान ही नहीं बल्कि अत्यंत बुद्धिमानी भी थे। उन्होंने माता सीता को न केवल आश्वासन दिया बल्कि उनके मन में यह विश्वास भी जगाया कि प्रभु राम उन्हें अवश्य लेने आएंगे।
जब लंकापति रावण के आदेश से हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई गई तब वही आग लंका के अहंकार को जलाने का कारण बनी। यह घटना सिखाती है कि जब अन्याय अपनी सीमा पार कर लेता है तब स्वयं ईश्वर की शक्ति उसका अंत करती है। हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी लेकिन निर्दोषों को हानि नहीं पहुंचाई। यही उनका धर्म था।
युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लाने की घटना हनुमान जी की निस्वार्थता का सर्वोच्च उदाहरण है हनुमान जी को यह नहीं पता था कि कौन सी जड़ी बूटी सही है इसलिए उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया। यह कार्य शक्ति का नहीं बल्कि जिम्मेदारी का था।
हनुमान जी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी विनम्रता है। इतने अद्भुत कार्य करने के बाद भी वे स्वयं को कुछ नहीं मानते। वे कहते हैं कि जो कुछ भी है वह सब प्रभु राम की कृपा से है। यही भक्ति भाव उन्हें देवों में भी देव बनाता है।
हनुमान जी को कलियुग का जागृत देव माना जाता है। कहा जाता है कि वे आज भी इस धरती पर विद्यमान हैं और जो भी सच्चे मन से उन्हें स्मरण करता है निस्वार्थ भाव से उनकी भक्ति करता है उसकी सहायता करने के लिए स्वयं चले आते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि मनोबल बढ़ाने का साधन है। यह भय को नष्ट करता है और आत्मविश्वास को दृढ़ करता है।
हनुमान जी हमें यह भी सिखाते हैं कि भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना या मंत्र पढ़ना नहीं है। सच्ची भक्ति तो वह है जिसमें कर्तव्य के प्रति ईमानदारी हो। जब हम अपने कार्य को पूरी निष्ठा से करते हैं और उसमें जरा भी स्वार्थ नहीं रखते तब वही भक्ति बन जाती है।
आज के समय में जब मनुष्य तनाव भय और असमंजस से घिरा रहता है तब हनुमान जी की कथा हमें यह याद दिलाती है कि शक्ति हमारे स्वयं के अंदर ही है। आवश्यकता है तो केवल विश्वास की। जब हम स्वयं पर और ईश्वर पर दृढ़ विश्वास करते हैं तब कोई भी बाधा बड़ी नहीं लगती।
हनुमान जी का कथा यह संदेश देती है कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है। जब हम बिना अपेक्षा किसी की सहायता करते हैं तब हम हनुमान जी के मार्ग पर चलते हैं। और ईश्वर को पा लेते हैं।
जय श्री राम
जय हनुमान



